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Romantic PoetryPoetry1 min read

कभी ऑन कभी ऑफ लाइन हो जाते हो

ashish.kumarmomashish.kumarmom November 6, 2021
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कभी ऑन कभी ऑफ लाइन हो जाते हो 
कभी प्राइवेसी तो कभी डीपी भी हटाते हो 
देख बेरुखी दोस्तो को तो निराशा होती है  
दीवानो की तो और भी वाट लग जाती है

दर्द भरी इस दुनिया में अब भी बाज न आते हो 
देख परछाई तेल में अंख बिच तीर चलते हो 
इस फरेबी दुनिया में ही अर्जुन को भी लजाते हो 
दर्द पे दर्द दे दे के प्यार का मजाक उड़ाते हो

किया जरूरत होती है जो ऐसा खेल रचाते हो 
देखते ही मूर्छित हो क्यों ऐसे आँख दिखते हो
स्टेटस स्टेटस खेल खेल के क्यों खेले जाते हो 
देख स्टेटस दूजे का ऐसी ऐसी तस्वीर लगते हो

लिखी पंक्तियो पढ़ भी, समझ न पाते हो  
या समझ समझ के भी तुम हमें झुठलाते हो
ऐसे बैसे बोल बोल क्यों तुम हमें सताते हो 
सच्चे प्यार पे भी तुम क्यों ऊँगली उठाते हो

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