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अपराजित कलिंग

Arvind ParasharArvind Parashar August 17, 2022
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अपराजित कलिंग'


युद्ध के बाद युद्ध हुआ था, अशोक का अशोक से।

शोक रहित का शोक मग्न से।

विजेताओं के अट्टहास गूँज रहे थे कानों में, शोक रहित था शोक मग्न है डूबा हुआ है जयकारों में।

हथियारों की होड़ मची है जयघोष के नारों में, पीड़ा के परिज्ञान में शोक मग्न है, शोक रहित था।

अब शांति के बाण चलेंगे, शोक रहित हथ चापों से

सारा आर्यावर्त गूँज उठेगा, बुद्ध धम्म के नारों से।



'अरविंद अपराजित'


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