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सफ़र मेरे प्रेम पथ का

अरुण मलिहाबादीअरुण मलिहाबादी April 1, 2022
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तुझसा देखा ना ग़ाफ़िल ...
सफ़र में रवानी अब कहाँ? 
महज़ दिल बहलाने का ज़रिया है ,
वरना चाँद ,तारो में मोहब्बत की
 निशानी अब कहाँ? 
 जिंदा तो है यहाँ सब हुस्न वाली,
पर ज़िन्दगानी कहा ?   
आँखों में मोहब्बत का दरिया है,
पर दरिया में मोहब्बत का पानी कहा ? 
जिंदा हुँ लेकिन ज़िन्दगानी कहाँ?

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