रोने लगो's image
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तुम उदासी को बना कर हमनफ़स रोने लगो
सोचो कोई सुन रहा है और बस, रोने लगो

मुस्कुराने की इजाज़त ही कहाँ है तुमको अब
बस यहीं तक है तुम्हारी दस्तरस, रोने लगो

जेल जैसी ज़िंदगी को भी जियो तो शान से
तोड़ तो सकते नहीं हो ये क़फ़स, रोने लगो

उस बरस में जिसको पाया इस बरस में खो दिया
उस बरस हँसते बहुत थे, इस बरस रोने लगो

ये मुहब्बत की ज़रूरत सब बदन की भूख है
लूट लेती है मुहब्बत को हवस, रोने लगो

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