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मैं भाषा हूँ।

ArchanashenoyArchanashenoy October 6, 2021
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भासते इति भाषा कहें विद्वान।

आत्म ज्योति कहे अनेक महान।

मेरी पहचान है अनोखी।

सरल, सहज, शुद्ध सुरीली।

भावनाओं की अभिव्यक्ति सागर सी।

प्रकृति के कण कण में बसी हूँ।

मौखिक, श्रवण, लिखत रुप में

सप्त स्वर, बच्चे की किलकारियां

माँ की ममता, ऋचाओं की संवेदना, 

साहित्यिक विधाओं में व्यक्त आलोचना

हर रूप, हर रंग में व्यापक हूँ।

मैं भाषा हूँ। भाष्य अलग है।

ऐक्यता की सूत्र धारा....

नित्य पल्लवित अंकुर सी।

पनपने की सरल आशा में

मैं भाषा हूँ......

             अर्चना शेणै के

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