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तुम्हारी बाली

AnupamAnupam December 17, 2021
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कल किताब में 
छुपी हुई 
तुम्हारी बाली मिली 

वहीं बाली 
जिससे जलता था मैं 

वहीं बाली 
जो तुमको छुती थी 
बेवजह

वहीं बाली 
जो तुमको प्यारी थी 
खुद से भी ज्यादा 

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