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वो एक पक्षी जो गुंजन कर रहा है,
वो मुझमे प्रेम सृजन कर रहा है,
बहुत दिन हो गये है तुमसे बिछड़े
तुम्हें मिलने को अब मन कर रहा है
.  अनुज गिरी

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