मैं कही दूर..'s image
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मैं कहीं दूर डूब रही थी

शाम की तरह

रात में।

मैं कहीं दूर भटक रही थी

प्यासी मृग की तरह

मृग मरीचिका में

और मैं चमक भी रही थी

टूटते तारे की तरह

शून्य में



अनु





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