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ये सिंदूर

HimanshiHimanshi December 22, 2021
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जिन निगाहों ने 
तेरे समाने के बाद
काजल को भी नकारा था
उन्हें किसी और के
दीदार में उम्र गुजारनी है
वस्ल के खौंफ से
मेरा जिस्म कंपकपाया है
ये सिंदूर ये चूड़ियां
ये सुर्ख दुपट्टा
मेरी देह पर पड़ी
वो आग है जिसकी
लपटों ने मेरी रूह 
दहकाया हैं

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