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फर्क 
इतना ही था
उसकी और मेरी
सोच में
उसने जिस्मों
का मिलना
जरूरत समझा
मैने रूह तक
पहुंचने का रास्ता

काश 
कभी दिखे उसे 
  झुरियो से घिरे 
  जिस्म की बेबसी
  और
 सदियों से जवान
 रूह की झलक

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