दादी की लाठी's image
Poetry1 min read

दादी की लाठी

Anoop RaturiAnoop Raturi September 27, 2021
Share0 Bookmarks 9 Reads1 Likes

खेत में पड़े पत्थर और उगी घास, 

उदास खेत में अब जोतने को रह क्या गया|


महल था तो कभी था, 

अब इस खंडहर में रह क्या गया|


शहर चले गए सभी अब, 

दादी की लाठी के सिवा रह क्या गया|


और अपनों ने भी छुड़वा लिए मेले में हाथ, 

अब मेले में देखने को रह क्या गया|

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts