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शहर अब तक जगा है उदासी से

Ankur MishraAnkur Mishra February 22, 2022
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जिदंगी का शोर, मौत का मौन
आज सब हैं, क्या पता कल कौन?

ज़िंदगी जल्दबाजी का सफर नहीं है,
वक्त से पूछो बताएगा कैसे जीना है!

बहुत लोगों ने कोशिश की है नीचे गिराने की,
मगर कुछ ने ठानी थी, मेरी हस्ती बनाने की!

शहर अब तक जगा है उदासी से,
गांव कब का सो गया खुशी खुशी

रास्ते कभी नहीं बताते कितना जुनून था तुममे,
मंजिल पर पहुँचने वाले को ही जानते हैं लोग!


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