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ये आँखो में क्या क्या लिए फिरती हो...

ankur gupta "ruhsafir"ankur gupta "ruhsafir" November 5, 2021
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ये आँखो में क्या क्या लिए फिरती हो...

ये एक कोने से झांकती शोख़ी

ये बाहर आने को बेताब शरारत

ये मंद मचलती हुई मस्ती

ये बिंदास बेफ़िक्री

ये नज़र में चढ़ती खुमारी

ये अल्हड़ इश्क़ का नूर

ये विरले प्रेम की गहराई

ये अपनी हस्ती पर नाज़

ये मन की मौज

ये बदन से उठती भाप

ये मौसम का मिज़ाज

ये कामना का राज़

ये नशीली नज़ाकत

ये बेवजह सा सुरूर

ये अलसाई फ़ुर्सत की

ये अपनी रूह का आइना

ये नई सच्चाई की रौनक़

ये पुराने यक़ीन की चमक

ये किसी चाहत का मज़ा

ये किसी दीवानगी का नशा

हमसे संभल कर रहना...हम वो भी देख लेते हैं जो तुम ख़ुद को भी नहीं दिखाती...ख़ुद को भी नहीं बताती

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