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मजबूरियाँ ढूँढते रहे सदा चाव बांधने को

मरहम बाहर ढूँढते रहे अंदर घाव बांधने को

लहरों का सफ़र करते तो पार पहुँच जाते

हम खूँटे ही ढूँढते रहे बस नाव बांधने को

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