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पिता होने का सौभाग्य

Ankur AggarwalAnkur Aggarwal October 24, 2021
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ईश्वर जब मुझसे खुश हुआ |

तब मैं आदमी से पिता हुआ |


तुम्हारा निश्चल मन, ये भोलापन,                

करते नई नई अठखेलियाँ |

ठुमक चाल, हृदय विशाल,                  

भाषा उत्पन्न करती नित नई पहेलियाँ |

और तुम्हारे चुम्बकीय आकर्षण के आगे, 

मेरा बुद्धि, ज्ञान, कौशल सब गौण हुआ |


ईश्वर जब मुझसे खुश हुआ |

तब मैं आदमी से पिता हुआ |


अपनी भाव भंगिमाओं से,                        

जाने क्या-क्या बता रहे हो |

बांटते प्रेम, लुटाते खुशियाँ, 

आनंद से जीना भी तो सिखा रहे हो |

ऊपर से ये मधुर मुस्कान, 

मानो मेरे अंहकार को ही हरा रहे हो |

चढ़ ना पाया मेरा रंग किसी पर, 

और तुम्हारे रंग में हर कोई रंगा हुआ |


ईश्वर जब मुझसे खुश हुआ |

तब मैं आदमी से पिता हुआ |


क्या लिखा तुमने मेरा भाग्य, 

ये पिता होने का सौभाग्य | 

साक्षात जीवन दर्शन करा दिया, 

अन्तर का बालक जगा दिया |

धन्यवाद करे हृदय ये मेरा, 

रोम रोम कृतज्ञ हुआ |


ईश्वर जब मुझसे खुश हुआ |

तब मैं आदमी से पिता हुआ |


~ अंकुर अग्रवाल

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