तुम्हारा हुस्न...'s image
Love PoetryPoetry2 min read

तुम्हारा हुस्न...

AnkitAnkit June 9, 2022
Share0 Bookmarks 8 Reads0 Likes

ये जो गुलाबी लिबास जो ओढ़कर आये हो,

क्या मेरे क़त्ल का इरादा कर के आये हो?

तुम्हारे इश्क़ के क़फस में क़ैद एक परिंदा हूँ मै,

तो क्या मेरी साँसें रोकने का ज़हर साथ लाये हो?



एक झलक क्या देख ली तुम्हारी हम तो दर-बदर हो गये, खुद को आईने की नज़र से बचाने का काजल लाये हो?

दो पल राब्ता करने की तमन्ना थी सीने में मेरे,

क्या दरयाफ़्त का ख़त साथ लाये हो?


नज़र भर देखना चाहते थे तुम्हें पर देख ना पाये,

एक तस्वीर मुझे दिल में देने की इज़ाज़त लाये हो?

आज हजारों दिलों का खूँ ज़मी पे गिरेगा तुम्हें देखकर,

क्या उन सभी कटे सरों का मुआवज़ा साथ लाये हो?


आंखो में काजल ओढ़कर नजरों को श्मश़ीर बना दिया तुमने,

क्या इस धार पे लगाम लगाने की म्यान साथ लाये हो?

गालो को धीरे से छूती हुई ये घुंघराली लटें जलाती हैं मुझे,

इस तपिश को ठंडा करने का पानी साथ लाये हो?


बेनज़ीर है ये तुम्हारे हुस्न की नुमाइश़,इसे मह़फिल में सजाने का पैमाना लाये हो?

बुत हो गया हूँ मैं तेरी झलक देखने बाद,

अब ये बताओ इस मौत का हर्जाना साथ लाये हो?


- अंकित

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts