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मैं चलूँगा ....

AnkitAnkit January 9, 2022
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मै चलूँगा, अन्त तक साथ तुम्हारे, मै चलूँगा।


चाहे गहरी रात हो, या सूनसान सन्नाटा,

तुम्हे बढ़ते रहने का साहस देने के लिये,

मैं चलूँगा, अन्त तक साथ तुम्हारे, मैं चलूँगा


चाहे सघन संघर्ष पथ हो, या जटिल गहराइयाँ,

तुम्हे सफलता के शिखर तक, पहुंचाने के लिये,

मै चलूँगा, अन्त तक साथ तुम्हारे, मै चलूँगा।


चाहे तुम थक कर चूर हो, या मंजिल कोसों दूर हो,

बन के क़दम तुम्हारा, तुम्हें अन्तिम सीढ़ी देने के लिये,

मैं चलूँगा, अन्त तक साथ तुम्हारे, मैं चलूँगा।


चाहे लाख अड़चन दे दुनियां, या मोती सा तुम्हें बिखेर दे,

बन कर धागा प्रेम का, तुम्हें पुन: पुहने के लिये,

मै चलूँगा, अन्त तक साथ तुम्हारे, मैं चलूँगा।


चाहे बाधाओं का चक्रव्यूह हो,या सात शत्रु भी सम्मुख हों,

बन कर रथ का पहिया, तुम्हें अमरत्व देने के लिये,

मैं चलूँगा, अन्त तक साथ तुम्हारे, मैं चलूँगा।


चाहे तुम संशय से भटके हो, या अज्ञानता में अटके हो,

बन कर पथ प्रदर्शक, तुम्हे विजय श्री देने के लिये,

मैं चलूँगा, अन्त तक साथ तुम्हारे, मैं चलूँगा।


चाहे तुम विरह से घायल हो, या अपूर्णता से पागल हो,

बन कर श्री कृष्ण, तुम्हें चिर पूर्णता देने के लिये,

मैं चलूँगा, अन्त तक साथ तुम्हारे, मैं चलूँगा।

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