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तेरी तिश्नगी से मैं आवारा हो गया,

क्या ऐसी होती है मोहब्बत कि मै बावरा हो गया।

बीच धार में डगमगाती कश्ती सा मैं उलट पलट,

एक तुम्हारी याद ही मेरा सहारा हो गया।


तेरी तलब ऐसी जगी मै दर बदर हो गया,

तेरी यादों में पागल मै इस क़दर हो गयाकि तूफां। मेरी निगाहों में लबों पे सन्नाटा था,

तुझसे प्यार करना मेरा ज़हर हो गया



तुम्हें आखिरी बार नज़र भर देख भी न पाये,

जाते हुए देखा लेकिन रोक भी न पाये। 

क़दमों में मायूसी और जहन में आग थी,

पलट कर गये तो एक आवाज टोक भी न पाये।


फक़ीर होकर तेरे हिज़्र में तुझे याद करते है,

काश तू मेरे आस पास हो फरियाद करते हैं।

दिल में चुभन लेकिन माथे में टशन लिये,

जा तुझे हम अपनी मोहब्बत से आजाद करते हैं।

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