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मौसम बिगाड़े अब कौन किस तरह।

Ankit KannaujiaAnkit Kannaujia February 3, 2022
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चराग़ जल रहा है लहू से जिस तरह

कहो जिंदा रहे अब कौन किस तरह


हवाओं से डर कर तूफां बच रहा है

मौसम बिगाड़े अब कौन किस तरह


कोई ज़रूरत नही है मुस्कुराने की

देखते हैं रोता है अब कौन किस तरह


पूछता हूँ हाल तो नाराज़ हो जाते हैं

रिश्ता निभाये अब कौन किस तरह।

         - अंकित कन्नौजिया






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