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क्यों शून्य से टकरा रही हो

Ankesh AnuragAnkesh Anurag October 28, 2021
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क्यों शून्य से टकरा रही हो
इश्क़ को क्यों छुपा रही हो

खुद को क्यों झुठला रही हो
सूखी पलकों को क्यों भीगा रही हो

नींद तो तुम्हे अब आती नही
फिर क्यों बिस्तर बिछा रही हो

तुम्हारे दिल में है दर्द तमाम
फिर क्यों गीत गुनगुना रही हो

इस नशे की कोई मर्ज़ नही
क्यों नशे को ज़ख्म बना रही हो

क्यों शून्य से टकरा रही हो
इश्क़ को क्यों छुपा रही हो

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