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कितनी सच्चाई थी उसकी मुस्कान मे
न चेहरे पर कोई ढोंग था, और
न दिल में कोई फरेब।
न कुछ खोने का गम था,और
न कुछ पाने का लालच।
बस जो भी था सच था।

एक  अलग ही चमक थी,उसकी आंखों में,
जैसे सारी खुशियां थी , उसके आंचल में।
आज मैंने देखी उस गरीब मां की अमीरियत
जिसका न कोई मोल था,न कभी होगा।।।।

© अंजली मिश्रा 

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