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ऐसी किस्मत कहाँ अपनी

Sandeep TyagiSandeep Tyagi April 8, 2022
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तेरी यादों में खोया हूँएक पल भी नहीं खाली

जमाने की मैं सोचूँ क्यामुझे फुर्सत कहाँ अपनी?

मिट्टी से जुड़ा हूँ मैंजमीं पर रहने दो मुझको

मैं उड़ के आसमां छू लूँऐसी हसरत कहाँ अपनी?

तू ख्वाबो की है शहजादीख्वाबो में ही रहना तू

तू हक़ीक़त जो हो जाएऐसी किस्मत कहाँ अपनी?

मेरे हिस्से में आये हैंजुदाईयोँ के बस किस्से

मैं बढ़ के चूम लूँ उसकोऐसी हिम्मत कहाँ अपनी?

मैं सदियों से अकेला हूँलगे जाले खयालो को

महफिलों की मैं सोचूँ जोऐसी सीरत कहाँ अपनी

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