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काश! राम तुम कलयुग में होते।

Anil jaswalAnil jaswal October 10, 2021
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आज जहां भी देखो,
है भ्र्र्रष्टाचार और 
आतंकवाद,
नहीं     सामने समाधान,
सबको    अपने से काम,
कहां   गया     सोहार्द,
भाईचारे  का  बस  नाम,
जैसे  ही  अपना  स्वार्थ पूरा,
सबको  सलाम।

सामने  नहीं  कोई  मिसाल,
जिसका  करें  अनुसरण,
अब  राम  भी  बस  रामलीला तक,
सुनने  में  अच्छा  लगता,
जब  उन  असूलोंं  पे 
आती चलने  की  बारी,  
सबकी  सांंसें  फूल  जाती   सारी की ‌‌‌सारी।

क्या  कोई  उतना  त्याग     कर  पाएगा,
मां बाप  का  इतना  सम्मान  रखेगा,
प्रजा  पर  मर  मिटेगाा,
दोस्त  का  राजभिषेेक       करेगा,
स्वयं वनवासी बनकर  घुुमेगा।

इतना  तपस्वी  राजा,
कहां  आज  दुुनिया में,
 जिसके लिए  प्रजा  हो
सर्वोत्तम,
बाकि  सबकुछ  बाद में।

तभी    राम को  मर्यादा पुरुषोत्तम बोला  गया,
राम राज्य  जैसा नहीं,
और राज्य देखा गया।

काश!  तुम  कलयुग में होते,
तो  हम भी  साक्षी होते,
राम राज्य की कल्पना नहीं   करते,
बल्कि  स्वयं ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌   देखतेे।
 

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