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तू गंगा की मौज

Anik ChakravortyAnik Chakravorty February 8, 2022
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जाने कैसे सपनों में अखियां खो जाती हैं

इतिहास में शायद एक ही वो, कभी आती हैं


पैर जब ज़मीं छोड़ उड़ते हुए ले जाती हैं

वो सिर्फ एक ही थी, इतिहास याद दिलाती हैं


चेहरे तो बदलतें हैं रोज़

बदलता ही जायेगा

सर आंखों पर आपका यह नाम लेकिन

कभी न गुम जाएगा


दम भर जो उधर मुंह फेरे

ओ चंदा आज तू

रो दे शायद तारीख की रुह

इस रात की सुबह शायद कभी न फिर आयेगी

ऐ चंदा, ओ सूरज, कूहू कुहू कोयलिया कभी न वैसे फिर गायेगी


चलते चलते सरेराह,

बचपन की मुहोब्बत

ज़माने भर की सो गई

यह जिंदगी तो,

उन्हिकी मौसिकी में खो गई


मौजो की रवानी

आज थम जाएगी

आयेंगे तो और कितने ही आनेवालें

"आयेगा आनेवाला"

और कौन वैसे ही पर गायेगी


ऐ दुनिया,

ऐ सारे वतन के लोगों,

आज भर आया आंखों में पानी

रुक गया ज़माना, सो गई सुर सुहानी ।

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