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और मौत वो पेड़ है

जिनकी छांव में एक दिन

पहुंचना ही है।


वो पेड़,

जिसकी छांव में पहुंचने की तैयारी ही लेकिन

ये पूरी जिंदगी है।


वो सागर

जहां हर नदी को सो जाना है

वो दश्त

जहां हर उम्मीद खो जाना है।


पर उगेंगे पौधे उसी दश्त में ही फिर

खिलखिलाते हुए

खिलेंगे फूल

नई नवेली मुस्कान लिए

उम्मीद जागेगी

हर नए सूरज की वादा लिए।

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