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कविताएं मेरा जीवन रच रही हैैं

Anchal PariharAnchal Parihar June 16, 2020
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दुनियादारी से निकालकर,

मन की डोर काव्य से गिरहें कस रही है।

कोई दुःख अब दुःख नहीं देता,

धीरे धीरे ये कविताएं मेरा जीवन रच रही हैं।

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