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यादों के सहारे जो जीता है, वो दर्द के लम्हों में जीता है..

Anas KhanAnas Khan November 20, 2022
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यादों के सहारे जो जीता है,
वो दर्द के लम्हों में जीता है..

ख्वाइशे दफन करता है,
और टुकड़ों को समेट लेता है..

ख्वाब भी बुनता है,
बिखेरता है,
वो फिर टूट कर भी संभल लेता है..

कोई मेरे जैसा शक्स है,
जो इन नज्मों में खुद को ढूंढ लेता है..

फुरकत में याद करता है,
क्या था में पहले ? फिर सवाल करता है,
जो मिली वो तन्हाई थी ! 
वो अब इसे हकीकत मान कर जी लेता है..

क्या उजड़ गय हे वो मकान जो बनाए थे ?
मेने खवाबो से अपने घर बनाए थे,
अब जो बिखरे हे तो कुछ भी पहले जैसा नहीं,
मेने ख्वाब सिर्फ लिखे हे और उन्हे किताबो में सजाए है..

-अनस 

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