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हमारे किस्से भी किसी अख़बार में निकले

Anand Mohan JhaAnand Mohan Jha October 1, 2021
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ज़रूरी तो नहीं कि सभी खूबियाँ उसी के किरदार में निकले

कभी हमारे किस्से भी किसी अख़बार में निकले

हमारे दरम्यां मोहब्बत नहीं थी कभी

ये दिल सब छोड़ कर कहीं तो यार निकले

शादी मजबुरी का सौदा है ये जान चुके हैं

इससे जान छुड़ाने का एक तो बहाना यार निकले

दिमाग़ कहता है कि उसे छोड़ दूँगा

यार दिल से भी तो ये बात निकले

आनन्द, अब जान जाये तो ये बन्धन टूटे

फिर हमारे किस्से भी किसी अख़बार में निकले




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