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दिल की दुकां में यूँ तो ख़सारा था उन दिनों

Amulya_MishraAmulya_Mishra September 23, 2022
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दिल की दुकां में यूं तो ख़सारा था उन दिनों
फिर भी वो एक शख़्श हमारा था उन दिनों

दुनिया के पास उसका कोई भी बदल नहीं
जो वक़्त तेरे साथ गुज़ारा था उन दिनों

जाने कहाँ भटक रहीं होंगी वो आजकल
तन्हाइयों को मेरा सहारा था उन दिनों

फ़ाके भी होते रहते थे आंखों में शर्म थी 
कुछ भी नहीं था फिर भी गुज़ारा था उन दिनों

धुंधला सा याद है मुझे हंसता हुआ "अमूल्य"
मेरे ख़याल से वो तुम्हारा था उन दिनों

- अमूल्य मिश्रा 

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