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मैं तुझे फ़िर मिलूँगा

Amitkumar YadavAmitkumar Yadav February 24, 2022
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नदिया की वो धार जब
तुझे छुकर गुज़रेगी
और छल छल उस आब से
तेरी दांईं प्यास बुझेगी
तब मैं तुझे फ़िर मिलूँगा

शमीम-ए-पैरहन-ए-यार जब
कुछ कुछ मुझसी महकेगी
और उस सर्द कोहसारों में जब
नैरंग एक गुल खिलेगी
तब मैं तुझे फ़िर मिलूँगा

खिलते उस गुल मैं जब
ज़िन्दगी की हलचल होगी
और थकी तेरी आँखों में जब
सुकून की नींद होगी
तब मैं तुझे फ़िर मिलूँगा

और फ़िर इस जहां में
या उस जन्म में
या फिर आज या कल में
या तेरी हयात के हर पल में
शायद मैं तुझे फ़िर मिलूँगा

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