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फिर गिर गया हूँ मैं , फिर मुझको अपना हाथ दो

Amit Radha Krishna NigamAmit Radha Krishna Nigam September 30, 2021
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फिर गिर गया हूँ मैं , फिर मुझको अपना हाथ दो

लब फिर ख़ामोश हैं मेरे, इनको तुम ही अपनी कोई बात दो।


मेरे सारे गुनाहो की, जवाबदेही तुमपर कबतक

तुम्हे मेरी खुद्दारी का वास्ता, मुझको अब तो कोई इल्ज़ामात दो।


नाम बहुत बड़ा है तेरा, उस नाम की तवज्जो में

भीख माँग रहा हूँ तुझसे, मुझे भीख में कायनात दो।


मोहरे भी तेरे चाल भी तेरी, नियम भी तेरे खेल भी तेरा

तमाशबीन अपने ही मुकद्दर के हम, अब जीत दो की मात दो ।

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