पथहीन जगत's image
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जल जंगल शांत, धरातल शांत

शांत रूप में आज फलक

शांत सृष्टि के रिक्त-माथ पर

अटल नियति का घना तिलक


अवश्यंभावी समय कि चाप

बंकर-बंद क्या मैं क्या आप

शिष्ट-अशिष्ट सब एक नकाब

बच्चो से दूर बूढ़े माँ बाप


व्याधि में विवश-ता का भार

पचने में कच्चा गोषताहार

(और) प्रकृति का प्रभुत्व समझने में

हमें लगे मास मात्र दो चार


अब ख़ाक दुहाई देते हैं

हम निरपराध भरपाई देते हैं

विषयासक्त की तुच्छ इकाई में सब

जीवन की दहाई देते हैं....

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