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मुसाफ़िर और हमसफ़र

Ambuj Garg (Bijnori)Ambuj Garg (Bijnori) November 17, 2022
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मैं था एक भटका हुआ मुसाफ़िर,

अन्जान थी मंज़िल की डगर,


सफर तय करता चला जा रहा था,

कि बन गए तुम मेरे हमसफ़र ।


बदल गई जीवन की दिशा,

और बदले मेरे अरमान,


साथ चले जब हम कदम मिलाकर,

तो पीछे छूट गए वक्त के निशान ।।


~ अम्बुज गर्ग

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