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हिंदी कविताPoetry1 min read

मैं और मेरे प्रभु गिरिधर नागर

Ambuj Garg (Bijnori)Ambuj Garg (Bijnori) November 20, 2022
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मैं पहली बारिश की एक मीठी बूंद हूँ, 

वो अमृत जल से छलकती गागर हैं, 


मैं हिमालय से बहती एक शांत नदी हूँ, 

वो उफनते विशाल हिंद महासागर हैं,


मैं गरीब की एक छोटी सी कल्पना हूँ,

वो अमीरों के बड़े सपनों के सौदागर हैं, 


मैं तो बस दो पल का मेहमान कवि हूँ, 

वो काव्य के स्रोत प्रभु गिरिधर नागर हैं।


~ अम्बुज गर्ग

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