शराब।'s image
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क्या कसूर है इसमें इसका,

जो दुनिया में मौजूद शराब है,


ख़ुद के बस में रहता ना इंसान,

और शराब को कहता ख़राब है,


ज़रा झांकिए इतिहास के तहख़ानों में,

कितने किस्से हैं रौशन मयख़ानों में,


कई यादगार ग़ज़ल और गीत हैं जिनमें,

शामिल ज़िक्र-ए-शराब है,


ख़ुद चल कर जाती है दुनिया,

कहां किसी को बुलाती शराब है,


इंसानियत शर्मसार इंसानों से है,

और बदनाम होती शराब है।


कवि-अंबर श्रीवास्तव।

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