अंबर।'s image
Share0 Bookmarks 8 Reads0 Likes

काश दूर कहीं ये अंबर भी,

नीले अंबर में खो जाए,


धरती पे मौजूद ये अंबर भी,

नीले अंबर सा हो जाए,


निश्चित है इस अंबर का भी,

एक न एक दिन अंत,


जीते जी तो हो जाए ये,

नीले अंबर सा अनन्त,


मीलों-मील फैला है,

ख़ूबसूरत नीला अंबर,


एक टक बस यूं ही निहारता है,

नीले अंबर को ये अंबर,


सूरज चाँद-सितारों से,

नीला अंबर आबाद है,


ये अंबर कुछ ख़ास तो नहीं,

पर हर ख़्याल से आज़ाद है,


ओर-छोर सीमाओं से,

परे है नीला अंबर,


किसी बंधन में तो बंधा नहीं पर,

सीमाओं में है ये अंबर,


कभी-कभी सोचता है,

धरती पे मौजूद ये अंबर,


नीले अंबर पे कैसे लिखे,

अपना नाम ये “अंबर”।


कवि-अंबर श्रीवास्तव।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts