रोटी's image
Share0 Bookmarks 28 Reads0 Likes

भूख लगती है कभी जो, याद इसकी आती है

ना मिले तो पेट में फिर, आग सी लग जाती है


राजा हो या रंक देखो, इसके सब ग़ुलाम हैतीनो

वक़्त खाने से पहले, करते इसे सलाम है


रुखी-सुखी जैसी भी हो, पेट यह भर जाती है

चाह में अपनी हर किसी, को राह से भटकाती है


जिसने इसको पा लिया, वो राज सब पर कर गया

ना मिली जिसे उसे, मुज़रीम भी देखो कर गया 


कितना भी हो प्रेम सब में, इसके आगे फीका है

ये चलाता है सभी को, सब पर वश इसिका है


पात पर पड़ा नहीं तो, जंग भी करवाता है

चाहे कितना बड़ा हवन हो, भंग भी करवाता है


दे सके ना जो पिता तो, वो पिता रहता नहीं

स्वामी रहता है नहीं, और नाथ रहता ही नहीं


इसके लिये हाथ जोड़े, सब खड़े हो जाते हैं

लम्बी कितनी भी रहे, क़तार में लग जाते है


क्या भला और क्या बुरा, इसके आगे कुछ नही

लूट लेना या लुट जाना, इसकी खातिर सब सही


कौन आगे क्या बनेगा, यह भी तय करता यही

नाम या बदनामी देगा, इसकी कही हीं है सही






No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts