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कोई पूछे मेरे दिल से

Aman SinhaAman Sinha April 16, 2022
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कोई पूछे मेरे दिल से, मैं क्युं गुमसुम सा रहता हूँ

सभी तो साथ है मेरे पर, मैं क्युं खोया सा रहता हूँ

है कितनी बात दबी दिल मे, जिन्हें हूँ चाहता कहना 

नज़ारे यूं तो काफी है, मुझे है बस एक तो तकना

 

है जैसे की वो परछाई, जिसे छु नहीं सकता

है मेरे पास वो लेकिन, साथ वो रह नहीं सकता

बहूत हूँ चाहता उसको, उसे ये कह नहीं सकता

लबों पर नाम है लेकिन, जुबा से ले नहीं सकता


उसी के ख़यालो मे, मैं अब हूँ जागता सोता

हंसी मेरी उसी से है, उसी के नाम से रोता

सुकून हैं वहीं मेरा, मेरी बेचैनी उसी से है

दवा है वही मेरा, मरज़ भी उसी से है


वही मंजिल है बस मेरी, मुसाफिर मैं उसिका हूँ

नसिबा है वही मेरा, मुकद्दर मैं उसी का हूँ

चलूँ कैसे मैं रास्ते में बस कंकड़ है कांटें हैं

मेरे हिस्से में मोहब्बत ने बस ठोकर ही बांटें हैं


है इतनी सी बस चाहत वो मुड़ के देख ले मुझको

सुना दूँ हाल-ए-दिल अपना इज़ाज़त दे कभी मुझको

मिले फुर्सत कभी उसको कहे मुझको के आके मिल

कही ना बात जो मन की धड़कना छोड़ ना दे ये दिल


ये मालूम है उसको मैं उसके बीन तड़पता हूँ

उसिके एक झलक को मैं गलियों मे भटकता हूँ

सभी कुछ जानती है वो तभी खिड़की पर आती है

कभी चादर जभी चुन्नी कभी केशों को सूखती है


यूं मिल जाना उन नज़रों का और बस ताकते रहना

बढ़ जाना यूं साँसों का ज़ुबा का काँपते रहना

ना वो बोले ना मैं बोलूं मगर सबकुछ बयां होना

नहीं हो एक लफ्ज फिर भी एहसासों का समझ जाना


भले हो भीड़ में लेकिन मुझे बस वो ही दिखती है

हसीं हो चाहे जितने भी नज़र उसी पर टिकती है

समझ कर हाल वो मेरा करम दे जरा मुझपर

इनायत हो निगाहों की मुझे वो देख ले मुड़कर


है ये मुमकिन के उसके बिन जीना छोड़ दूंगा मैं

अगर मिल जाए वो मुझको पीना छोड़ दूंगा मैं

ये वादा है मेरा उससे न जाऊंगा मैं मै खाने

कसम खाता हूँ मैं अभी के ये बोतल तोड़ दूँगा मैं







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