जो मैं होता गीत कोई's image
Poetry2 min read

जो मैं होता गीत कोई

Aman SinhaAman Sinha July 6, 2022
Share0 Bookmarks 39 Reads0 Likes

जो मैं होता गीत कोई तो तुम भी मुझको गा लेते 

जो मैं होता खामोश परिंदा तो अपना मुझे बना लेते 

जो मैं होता फूल कोई तो गजरा मुझे बना लेते 

जो मैं होता इत्र कोई तो तन पर मुझे लगा लेते

 

        जो मैं होता काजल तो तुम टीका मेरा कर लेते

        जो मैं होता रंग कोई तो होंठो पर मुझे धर लेते

        जो मैं होता मेहँदी तो बस तेरे हीं हांथों पर सजाता 

        जो मैं होता चूड़ी कंगन तो तुझे चैन ना मेरे बिन होता 


जो मैं होता वस्त्र कोई तो तेरे तन की शोभा होता 

            जो मैं होता चित्र कोई तो तेरी हीं मैं आभा होता 

            जो मैं होता तेरा तकिया तो मुझे भींच के बाहों में सोता 

            जो मैं होता प्रार्थना कोई तो बस तेरे मन में ही बसता

 

                जो मैं होता मंत्र कोई तुम मुझको रख लेते अपने अधरों पर 

                जो मैं होता प्रतिबिंब कोई तो तुम मुझको रखते अपने खुटें पर 

जो मैं होता माह कोई तो बस सावन बनकर आता 

                बनकर काली घटा मैं तेरी घनी जुल्फों में खो जाता



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts