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इर्फ़ान की याद में

Aman SinhaAman Sinha May 2, 2022
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मैं था, मैं हूँ, और मैं रहूँगा

हुनर बनकर मैं रगों मे बहूँगा

चाहे जितना भी भुलाना चाहे ज़माना मुझको

मैं याद बनकर ज़हन में आता रहूँगा


अभी नहीं हुआ तो कुछ दिन बाद हो जाएगा

हुजूर ये इश्क़ है आज ना सही कल हो जाएगा

कोशिश करने मे हर्ज़ क्या है यारों

दिल आज सोया है तो कल जाग जाएगा


दर्द कई हैं जमाने में सबको लेकिन

बस कुछ ही होते हैं जो नासूर बन जाता है

अलविदा ना कह पाना अपनो को रुखसती में

अक्सर दिल मे कांटें सा चुभ जाता है


इश्क़ है उससे सिद्दत वाला तभी तो जाने दिया

जो जुनून बना लेता तो वो मेरे बाहों मे होती

आज वो नूर किसी और के आशियाने की तभी

वरना वो हमारे जन्नत की कोहीनूर रही होती


कहते हैं ज़िंदगी सभी की कह कर लेती है

निचोड़ लेती है तुम्हे और हाथों मे नींबू दे देती है

पर क्या करें हम उस नींबू का यारों

नहीं शिकंजी बनती है, ना ही मजा देती है


कई बार कोशिश की खुदको मिटाने की लेकिन

ना हिम्मत हुई ना ही कोई बहाने मिले

वही दुनिया है वही पहिये है ज़िंदगी के अब भी

पहले तो न कभी ऐसे कोई नज़ारे मिले


कई रात से मैं नींद भर सोया हीं नहीं

पता नहीं क्यों आज मां की गोद बड़ी याद आई

बाल सहलाते हुए वो मां की उँगलियाँ

याद आई तो आज मुझे बस रुला के गयी







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