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दिलबर है ना तो कोई रहबर है

हाल-ऐ-दिल सुनाए तो किसको

मिले हमसा हमको इस जहां में

खोल के ये दि ल दि खाए उसिको


फासले दरम्यान है हम दोनों के लेकि न

कदम न चले तो मिटेंगे वो कैसे

उन रेलों की पटरी को देखा है मैंने

मिलते नहीं पर संग चलते है जैसे


जो हम न रहे तो रोओगे तुम भी

दि ल से हमे तुम भुलाओगे कैसे

बदन पे तुम्हा रे जो लि ख गया है

मेरा नाम अब तुम मिटाओगे कैसे


है सपना अगर ये तो सोने हो दोना

अगर जग गया मैं तो पाओगे तुम क्या?

है नुक्सान तेरा भी मेरे तरह ही

भला सोए रहने में नुक्सान है क्या?


न देखोगे तुम तो हमे क्या मि लेगा

के पहले सा फि र ये चमन ना खिलेगा

ये गालियां भी होंगी ये सड़के भी होंगी

मगर तुमको हंसा हमसफ़र ना मिलेगा


थामेगा कोई जो दामन को तेरे

तुझे उसमे मुझसा सबर ना मिलेगा

है एहसास मुझको उसे इस जनम में

तेरा तन तो मि लेगा पर मन ना मिलेगा

हमने जो लेली संग फेरे कि सीके

उसे हमसा सितमगर सनम ना मिलेगा

दोनों ही तरसेंगे फिर एक दूसरे को

वो पहली नज़र का असर ना मिलेगा


ख़ुशी न मिलेगी के हम जितना भी रोलें

टुकड़ो के दि ल को हम जितना भी सीलें

मिलेगी जो फुर्सत हमें तेरे ही ग़म से

मिला लेंगे दिल फिर नए उस सनम से

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