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घनी अंधेरी रात है गर

कल इक सुबह भी आएगी

आंसुओं के बादलों से

फिर रोशनी टकराएगी

चलेंगी हवाएं, चराग भी बुझेंगे

तेरी साजिशों से हम नहीं डरेंगे

मेरी रूह भी अब ये कहेगी

बेहद आसान है तू ऐ जिंदगी


सफर में हों अड़चनें, तो क्या हुआ

लाख दे तू मुश्किलें, तो क्या हुआ

गर हैं हजार बंदिशें, तो क्या हुआ

कभी कभी रो पड़े, तो क्या हुआ

मैं इन ठोकरों से क्यूं डरूं

मैं क्यूं करूं किसी की बंदगी

ये बात आज मैंने जान ली

बेहद आसान है तू ऐ जिंदगी






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