सिर्फ़ झांकी है's image
Poetry1 min read

सिर्फ़ झांकी है

Aman Pratap SinghAman Pratap Singh February 14, 2022
Share0 Bookmarks 0 Reads0 Likes
ये तेज़ तेज़ हृदय गति
कण कण में है उसके प्यार रति
ठहर जाए बस नज़रें मिलने भर से
जज़्बातों में हो जाए "प्रगति"
वो शाहजहां की मुमताज़ नहीं
खुली खुली उम्मीदें है, कोई राज़ नहीं
हमें बातों से अकसर उसने है छुआ
हमारा इश्क़ चरम पर है, कोई आगाज़ नहीं..
ये भवानाओं की आशिकी है
हमारा मिलना तौफिकी है
अंजाम शून्य है इसका
फिर भी ये तो सिर्फ झांकी है।।
~अमन 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts