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कुछ बातें होंगी
हमारी मुलाकातें होंगी
अधर में जो क़िस्मत पड़ी है
उसकी रातें भी होंगी
अभी थोड़ा हमें संभलने दो
जले कोयले पे चलने दो
इक रोज़ हम चल के आयेंगे
बादलों से सूरज को निकलने दो...
गहरे राज़ है 
घिरे हुए ताज़ है
सारी ख्वाईश दबी सी है
उसका कल हमारा आज है..
~अमन

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