बारूद का नगर's image
Poetry1 min read

बारूद का नगर

Aman Pratap SinghAman Pratap Singh March 23, 2022
Share0 Bookmarks 20 Reads0 Likes
कोई डूबा है 
घमंड लहर में
कोई जगा है
अंधेर शहर में
सबकी अपनी अपनी
ब्यथा है
सबकी अपनी अपनी
कथा है, 
उलझा हुआ है आसमां
विचारों के ज़हर में
किस करवट 
क़िस्मत पलटे
हक़ीक़त से है
आबरू लूटे
अभी हवाओं में वबा 
का कहर है
आज़ादी फंसी है
बारूदों के नगर में.. 

~अमन

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts