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आखिरी रात में इंसान क्या मांगें

Aman Pratap SinghAman Pratap Singh October 18, 2021
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आख़िरी रात में इंसान क्या मांगे
हक़ की आवाज़ दब गई
मुसीबत सर पे चढ़ गई
मेहनत से मिट्टी का घर बना था
वो भी ऊंची इमारतों के नीचें धंस गई..

आख़िरी रात में इंसान क्या मांगे
जो छीन गई रातें वो देगा क्या
उससे कही बातें वो कहेगा क्या
पल पल का दर्द वो सहेगा क्या
हमारे सपनों को साकार करेगा क्या...

आख़िरी रात में इंसान क्या मांगे
जो बाकी रह गया वो कब पूरा होगा
अधूरे छोड़ जाए तो सब बुरा होगा
स्वर्ग जैसे जगह पर बस कूड़ा होगा
हमारे बीना हमारा घर अधूरा होगा

आख़िरी रात में इंसान क्या मांगे
सब खुदा का है , अब खुदा से क्या मांगे
गिरे दरख़्त से फ़ल मांगे
आज छोड़ क्या कल मांगे
हां, आख़िरी सांस है, आख़िरी रात है
आख़िरी बात है, आख़िरी मुलाक़ात है
जाते जाते इंसान क्या मांगे..

~अमन

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