आधी रात's image
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आधी रात से अधर में हूं
ना जाने किस समर में हूं
यादें भिगो देती है हमें उसकी
उसके वादों के कठिन डगर में हूं
राहों की मुश्किलें संभाल लूंगा मैं
उसके कही बातें भी मान लूंगा मैं
उसकी बातों में जो धोखा है
उन्हीं बातों के जख्मी सफ़र में हूं
आहिस्ता आहिस्ता पार कर जाऊंगा
खुदा जानता है जां निसार कर जाऊंगा
ऊंचे ऊंचे पहाड़ों को तोड़ा है हमने
अभी फ़िलहाल रिस्तों में पड़े दरार में हूं।।
~अमन

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