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चाहे मेरे बाद लिख दे

Aman MusafirAman Musafir January 4, 2022
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जो किसी बुझते हुए दीपक को पल भर रोशनी दे

जो किसी मृत स्वप्न को झंकृत करे और रागिनी दे

जो किसी की वेदना को हाथ भर आकाश दे दे

जो किसी मृतप्राय के सम्मुख क्षणिक विश्वास दे दे

ओ कवि लेकर कलम को

ऐसे कुछ संवाद लिख दे


चाहे मेरे सामने या चाहे मेरे बाद लिख दे ।

लिख दे कुछ ऐसा जो धरती और गगन को एक कर दे

लिख दे कुछ ऐसा कहीं पर जो किसी का शून्य भर दे

लिख दे कुछ ऐसा की जिसको शिशु भी सुनकर मुस्कुराए

लिख दे कुछ ऐसा की जिसको यह ज़माना ख़ूब गाए

या तो केवल नाम इनका

स्मरण कर याद लिख दे

चाहे लिख दे संत तुलसी चाहे पंत-प्रसाद लिख दे


लिख सके तो लिख दे जग की पीर अपने चक्षुओं से

लिख सके तो लिख दे बहता नीर अपने चक्षुओं से

लिख सके तो नफरतों के बदले केवल प्यार लिख दे

लिख सके तो पेट के ऊपर कोई आहार लिख दे

भूख का होता नहीं है

कोई भी तू वाद लिख दे

चाहे तो आबाद लिख या चाहे तू बरबाद लिख दे


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