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मैं ना नाम लिखुं

Alok RanjanAlok Ranjan January 5, 2022
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तुम लिखो हाय हैलो

मैं सिर्फ प्रणाम लिखूं

सब-कुछ लिखुं एक चिट्ठी में

बस मैं ना नाम लिखुं।


आना जाना ख्वाबों हरपल

हिचकियां प्रतिपल

सबूत अब क्या लिखूं

कुछ बूंदें आंसू के परिणाम लिखुं।



चुपके-चुपके मुझे क्यों सताते हो

मैं ढुंढ रही तुमको तुम मुझमें कहीं आते हो

क्या लिखूं कब लिखुं या सुबह-शाम लिखुं

यादें तो अनमोल है सारी अब क्या मैं दाम लिखुं।


-आलोक रंजन

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