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यादों का दर्पण

Alok DubeyAlok Dubey October 5, 2021
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खुद को अधूरा मत छोड़ो,

फिर कब हम और तुम आएँगे,,

लौटकर कहाँ हम मिल पाएँगे

एक बार उठ गया जनाजा

तो बस यादों में रह जाएँगे

एक पल एक लम्हा 

ऐसे भी जी लेते हम

जब भी याद करते 

एक सिहरन सी,उठती बालों में

हँसी होती गालों में

में उस पल को जीना चाहता हूं

जहाँ तुम मेरी हो और में तेरा हूँ,,

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